देखा है ज़िंदगी को कुछ इतना करीब से
देखा है ज़िंदगी को, कुछ इतना करीब से
चहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से
कहने को दिल की बात जिन्हें ढूँढते थे हम \- २
महफ़िल मेइं आ गये हैं वो अपने नसीब से
देखा है ज़िंदगी को, कुछ इतना करीब से
नीलम हो रहा था किसी नाज़नीन का प्यार \- २
क़ीमत नहीं चुकाई गैइ इक ग़रीब से
देखा है ज़िंदगी को, कुछ इतना करीब से
तेरी वफ़ा की लाश पे ला मैं ही डाल दूँ \- २
रेशम का ये कफ़न जो मिला है रक़ीब से
देखा है ज़िंदगी को, कुछ इतना करीब से
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