बड़ी सूनी सूनी है ज़िंदगी ये ज़िंदगी

बड़ी सूनी सूनी है ज़िंदगी ये ज़िंदगी-2
मैं खुद से हूँ यहाँ अजनबी अजनबी
बड़ी...

कभी एक पल भी, कहीं ये उदासी
दिल मेरा भूले
कभी मुस्कुराकर दबे पाँव आकर
दुख मुझे छूले
न कर मुझसे ग़म मेरे, दिल्लगी ये दिल्लगी
बड़ी...

कभी मैं न सोया, कहीं मुझसे खोया
सुख मेरा ऐसे
पता नाम लिखकर, कहीं यूँही रखकर
भूले कोई कैसे
अजब दुख भरी है ये, बेबसी बेबसी
बड़ी...


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