वो शाम कुछ अजीब थी, ये शाम भी अजीब है

वो शाम कुछ अजीब थीये शाम भी अजीब है
वो कल भी पास पास थीवो आज भी करीब है

झुकी हुई निगाह मेंकहीं मेरा ख़याल था
दबी दबी हँसीं में इकहसीन सा सवाल था
मैं सोचता थामेरा नाम गुनगुना रही है वो
न जाने क्यूँ लगा मुझेके मुस्कुरा रही है वो
वो शाम कुछ अजीब थी ...

मेरा ख़याल हैं अभीझुकी हुई निगाह में
खुली हुई हँसी भी हैदबी हुई सी चाह में
मैं जानता हूँमेरा नाम गुनगुना रही है वो
यही ख़याल है मुझेके साथ आ रही है वो

वो शाम कुछ अजीब थीये शाम भी अजीब है
वो कल भी पास पास थीवो आज भी करीब है



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