ओ साथी रे, तेरे बिना भी क्या जीना

(ओ साथी रेतेरे बिना भी क्या जीना
 फूलों में कलियों मेंसपनों की गलियों में
 तेरे बिना कुछ कहीं न
 तेरे बिना भी क्या जीना)   -

ओ साथी रेतेरे बिना भी क्या जीना
तेरे बिना भी क्या जीना

जाने कैसे अनजाने हीआन बसा कोई प्यासे मन में
अपना सब कुछ खो बैठे हैंपागल मन के पागलपन में
दिल के अफ़साने...
दिल के अफ़सानेमैं जानूँ तू जानेऔर ये जाने कोई न
तेरे बिना भी क्या जीना
ओ साथी रे...

हर धड़कन में प्यास है तेरीसाँसों में तेरी खुशबू है
इस धरती से उस अम्बर तकमेरी नज़र में तू ही तू है
प्यार ये टूटे न ...
प्यार ये टूटे नतू मुझसे रूठे नसाथ ये छूटे कभी न
तेरे बिना भी क्या जीना
ओ साथी रे ...

तुझ बिन जोगन मेरी रातेंतुझ बिन मेरे दिन बंजारन
मेरा जीवन जलती बूँदेंबुझे\-बुझे मेरे सपने सारे
तेरे बिना मेरी थ्रेएदोत्स
तेरे बिना मेरीमेरे बिना तेरीये ज़िंदगी ज़िंदगी न
तेरे बिना भी क्या जीना
ओ साथी रे...



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