मुसाफिर हूँ यारों

मुसाफ़िर हूँ मैं यारों
ना घर है ना ठिकाना
मुझे चलते जाना हैबसचलते जाना
मुसाफ़िर...

एक राह रुक गईतो और जुड़ गई
मैं मुड़ा तो साथ\-साथराह मुड़ गई
हवा के परों पेमेरा आशियाना
मुसाफ़िर...

दिन ने हाथ थाम केइधर बिठा लिया
रात ने इशारे सेउधर बुला लिया
सुबह से शाम से मेरादोस्ताना
मुसाफ़िर...



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