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Showing posts from 2016

ये क्या हुआ कैसे हुआ कब हुआ

ये क्या हुआ , कैसे हुआ , कब हुआ अब क्या सुनाएं ? ( ये क्या हुआ , कैसे हुआ , कब हुआ , क्यूँ हुआ , जब हुआ , तब हुआ -2 ) ओ छोड़ो , ये ना सोचो , ये क्या हुआ... हम क्यूँ , शिकवा करें झूठा , क्या हुआ जो दिल टूटा -2 शीशे का खिलौना था , कुछ ना कुछ तो होना था , हुआ ये क्या हुआ... ऐ दिल , चल पीकर झूमें , इन्हीं गलियों में घूमें -2 यहाँ तुझे खोना था , बदनाम होना था , हुआ ये क्या हुआ... हमने जो , देखा था सुना था , क्या बताऐं वो क्या था -2 सपना सलोना था , खत्म तो होना था , हुआ ये क्या हुआ...

ये जो मुहब्बत है ये उनका है काम

ये जो मुहब्बत है , ये उनका है काम महबूब का जो , बस लेते हुए नाम मर जाएं ,  मिट जाएं ,  हो जाएं बदनाम रहने दो छोड़ो भी जाने दो यार हम ना करेंगे प्यार रहने दो छोड़ो भी जाने दो यार हम ना करेंगे प्यार टूटे अगर सागर नया सागर कोई ले ले मेरे खुदा दिल से कोई किसी के न खेले दिल टूट जाए तो क्या हो अंजाम ये जो ... आँखे किसी से न उलझ जाए मैं डरता हूँ यारों हसीनों की गली से मैं गुज़रता हूँ बस दूर ही से कर के सलाम ये जो ...

तुम आ गए हो नूर आ गया

किशोर:            तुम आ गए हो नूर आ गया है -2 नहीं तो चराग़ों से लौ जा रही थी लता:    जीने कि तुमसे वजह मिल गई है बड़ी बेवजह ज़िंदगी जा रही थी किशोर:            तुम आ गए हो नूर आ गया है किशोर:            कहाँ से चले कहाँ के लिये ये खबर नहीं थी मगर कोइ भी सिरा जहाँ जा मिला वहीं तुम मिलोगे के हम तक तुम्हारी दुआ आ रही थी तुम आ गये हो नूर आ गया हैं लता:    नहीं तो चराग़ों से लौ जा रही थी तुम आ गए हो नूर आ गया हैं लता:    दिन डूबा नहीं रात डूबी नहीं जाने कैसा है सफ़र ख़्वाबों के दिये आँखों में लिये वहीं आ रहे थे जहाँ से तुम्हारी सदा आ रही थी तुम आ गये हो नूर आ गया हैं नहीं तो चरागों से लौ जा रही थी

पत्थर की हवेली को शीशे के घरौंदों में

ल: इस मोड़ से जाते हैं -2 कुछ सुस्त क़दम रस्ते कुछ तेज़ क़दम राहें -2 कि: पत्थर की हवेली को शीशे के घरौंदों में तिनकों के नशेमन तक इस मोड़ से जाते हैं ल: आँधी की तरह उड़कर इक राह गुज़रती है -2 शरमाती हुई कोई क़दमों से उतरती है इन रेशमी राहों में इक राह तो वो होगी तुम तक जो पहुंचती है इस मोड़ से जाती है इस मोड़ से जाते हैं... कि: इक दूर से आती है पास आके पलटती है -2 इक राह अकेली सी रुकती है न चलती है ल: ये सोचके बैठी हूँ इक राह तो वो होगी तुम तक जो पहुंचती है इस मोड़ से जाते हैं इस मोड़ से जाते हैं कुछ सुस्त क़दम रस्ते कुछ तेज़ क़दम राहें कि: पत्थर की हवेली को शीशे के घरोंदों में तिनकों के नशेमन तक इस मोड़ से जाते हैं ल: इस मोड़ से जाते हैं

ओ मांझी रे अपना किनारा नदिया की धारा है

ओ मांझी रे ,  अपना किनारा ,  नदिया की धारा है ओ मांझी रे ... साहिलों पे बहने वाले , कभी सुना तो होगा कहीं , ओ ... हो ,  कागज़ों की कश्तियों का , कहीं किनारा होता नहीं हो मांझी रे ... मांझी रे कोई किनारा जो किनारे से मिले वो , अपना किनारा है ... , ओ मांझी रे ... पानियों में बह रहे हैं , कई किनारे टूटे हुए ओ ... हो , रास्तों में मिल गए हैं     , सभी सहारे छूटे हुए ... कोइ सहारा मझधारे में मिले वो , अपना सहारा है ... ओ मांझी रे ,  अपना किनारा ,  नदिया की धारा है ओ मांझी रे ...

कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना

कुछ तो लोग कहेंगे , लोगों का काम है कहना छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना -2 कुछ तो लोग कहेंगे , लोगों का काम है कहना कुछ रीत जगत की ऐसी है , हर एक सुबह की शाम हुई -2 तू कौन है , तेरा नाम है क्या , सीता भी यहाँ बदनाम हुई फिर क्यूँ संसार की बातों से , भीग गये तेरे नयना कुछ तो लोग कहेंगे , लोगों का काम है कहना छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना कुछ तो लोग कहेंगे ... हमको जो ताने देते हैं , हम खोए हैं इन रंगरलियों में -2 हमने उनको भी छुप छुपके , आते देखा इन गलियों में ये सच है झूठी बात नहीं , तुम बोलो ये सच है ना कुछ तो लोग कहेंगे , लोगों का काम है कहना छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना कुछ तो लोग कहेंगे ...

दिल ऐसा किसीने मेरा तोड़ा बर्बादी की तरफ़ ऐसा मोड़ा

दिल ऐसा किसीने मेरा तोड़ा ,   बर्बादी की तरफ़ ऐसा मोड़ा -2 एक भले मानुश को , अमानुश बनाके छोड़ा दिल ऐसा किसीने मेरा तोड़ा , बर्बादी की तरफ़ ऐसा मोड़ा साग़र कितना मेरे पास है ,   मेरे जीवन में फिर भी प्यास है -2 है प्यास बड़ी जीवन थोड़ा , अमानुश बनाके छोड़ा... कहते हैं ये दुनिया के रास्ते , कोई मंज़िल नहीं तेरे वास्ते -2 नाकामियों से नाता मेरा जोड़ा , अमानुश बनाके छोड़ा... डूबा सूरज फिर से निकले , रहता नहीं है अंधेरा मेरा सूरज ऐसा रूठा , देखा न मैंने सवेरा उजालों ने साथ मेरा छोड़ा , अमानुश बनाके छोड़ा दिल ऐसा किसीने मेरा तोड़ा...

चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाये

आनंद बाबू : रो मत पुश्पा , आज तुम जो हो जिस जगह हो , तुम्हारे आँख के पानी saline water, I mean नमकीन पानी के अलावा कुछ नहीं है \. इसलिये इन्हें पोंछ डालो पुश्पा , I hate tears. पुश्पा : हाँ आनंद बाबू आप ठीक कहते हैं.   बैठिये. आनंद बाबू : छोड़ो पुश्पा , चलो आज कहीं बाहर चलते हैं. ढूँढें कोई ऐसी जगह जहाँ थोड़ी देर के लिये ही सही कुछ याद न आये , न तुम्हें न मुझे. चिंगारी कोई भड़के ,  तो सावन उसे बुझाये सावन जो अगन लगाये ,  उसे कौन बुझाये , ओ... उसे कौन बुझाये पतझड़ जो बाग उजाड़े ,  वो बाग बहार खिलाये जो बाग बहार में उजड़े ,   उसे कौन खिलाये ओ... उसे कौन खिलाये हमसे मत पूछो कैसे ,  मंदिर टूटा सपनों का -2 लोगों की बात नहीं है ,  ये किस्सा है अपनों का कोई दुश्मन ठेस लगाये ,  तो मीत जिया बहलाये मन मीत जो घाव लगाये ,  उसे कौन मिटाये न जाने क्या हो जाता ,  जाने हम क्या कर जाते -2 पीते हैं तो ज़िन्दा हैं ,  न पीते तो मर जाते दुनिया जो प्यासा रखे ,  तो मदिरा प्यास बुझाये मदिरा जो प्यास लगाये ,...

बड़ी सूनी सूनी है ज़िंदगी ये ज़िंदगी

बड़ी सूनी सूनी है ज़िंदगी ये ज़िंदगी -2 मैं खुद से हूँ यहाँ अजनबी अजनबी बड़ी... कभी एक पल भी , कहीं ये उदासी दिल मेरा भूले कभी मुस्कुराकर दबे पाँव आकर दुख मुझे छूले न कर मुझसे ग़म मेरे , दिल्लगी ये दिल्लगी बड़ी... कभी मैं न सोया , कहीं मुझसे खोया सुख मेरा ऐसे पता नाम लिखकर , कहीं यूँही रखकर भूले कोई कैसे अजब दुख भरी है ये , बेबसी बेबसी बड़ी...

आए तुम याद मुझे गाने लगी हर धड़कन

आए तुम याद मुझे , गाने लगी हर धड़कन ख़ुशबू लाई पवन , महका चंदन आए तुम याद मुझे ... जिस पल नैनों में सपना तेरा आए उस पल मौसम पे मेंहंदी रच जाए -2 और तू बन जाये जैसे दुल्हन आए तुम याद मुझे ... जब मैं रातों में तारे गिनता हूँ और तेरे कदमों की आहट सुनता हूँ -2 लगे मुझे हर तारा तेरा दरपन आए तुम याद मुझे ... हर पल मन मेरा मुझसे कहता है जिसकी धुन में तू खोया रहता है -2 भर दे फूलों से उसका दामन आए तुम याद मुझे ...

फिर वही रात है फिर वही रात है ख्वाब की

फिर वही रात है ... hmmmm hmm hmmm फिर वही रात है ,  फिर वही रात है ख्वाब की हो ... रात भर ख्वाब मैं देखा करेंगे तुम्हे फिर वही रात है ... हो ... काँच के ख्वाब हैं ,  आँखों में चुभ जायेंगे हो ... पलकों पे लेना इन्हें ,  आँखों में रुक जायेंगे हो ... ये रात है ख्वाब की ,  ख्वाब की रात है फिर वही रात है... ,  फिर वही रात है फिर वही रात है ख्वाब की हो ... मासूम सी नींद मैं ,  जब कोई सपना चले हो ... हम को बुला लेना तुम ,  पलकों के पर्दे तले हो ये रात है ख्वाब की ,  ख्वाब की रात है फिर वही रात है... फिर वही रात है फिर वही रात है ख्वाब की फिर वही रात है ... hmmmm hmmmmm hmmmmm ... रात है ...  hmmmm hmmm hmmmm ... रात है...

दिल आज शायर है ग़म आज नग़मा है

दिल आज शायर है ,  ग़म आज नग़मा है शब ये ग़ज़ल है सनम गैरों के शेरों को ओ सुनने वाले हो इस तरफ़ भी करम आके  ज़रा देख तो तेरी खातिर हम किस तरह से जिये-2 आँसू के धागे से सीते रहे हम जो ज़ख्म तूने दिये चाहत की महफ़िल में ग़म तेरा लेकर क़िस्मत से खेला जुआ दुनिया से जीते पर तुझसे हारे यूँ खेल अपना हुआ ... ये   प्यार हमने किया जिस तरह से उसका न कोई जवाब-2 ज़र्रा थे लेकिन तेरी लौ में जलकर हम बन गए आफ़ताब हमसे है ज़िंदा वफ़ा और हम ही से है तेरी महफ़िल जवाँ जब हम न होंगे तो रो रोके दुनिया ढूँढेगी मेरे निशां ... ये   प्यार कोई खिलौना नहीं है हर कोई ले जो खरीद)  -2 मेरी तरह ज़िंदगी भर तड़प लो फिर आना इसके करीब हम तो मुसाफ़िर हैं कोई सफ़र हो हम तो गुज़र जाएंगे ही लेकिन लगाया है जो दांव हमने वो जीत कर आएंगे ही ...

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतना करीब से

देखा है ज़िंदगी को ,  कुछ इतना करीब से चहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से कहने  को दिल की बात जिन्हें ढूँढते थे हम  \-  २ महफ़िल मेइं आ गये हैं वो अपने नसीब से देखा है ज़िंदगी को ,  कुछ इतना करीब से नीलम  हो रहा था किसी नाज़नीन का प्यार  \-  २ क़ीमत नहीं चुकाई गैइ इक ग़रीब से देखा है ज़िंदगी को ,  कुछ इतना करीब से तेरी  वफ़ा की लाश पे ला मैं ही डाल दूँ  \-  २ रेशम का ये कफ़न जो मिला है रक़ीब से देखा है ज़िंदगी को ,  कुछ इतना करीब से

घुँघरू की तरह बजता ही रहा हूँ मैं

घुँघरू की तरह बजता ही रहा हूँ मैं कभी इस पग में कभी उस पग में बँधता ही रहा हूँ मैं घुँघरू की तरह ... कभी  टूट गया कभी तोड़ा गया सौ बार मुझे फिर जोड़ा गया यूँ ही टूट - टूट के ,  फिर जुट - जुट के बजता ही रहा हूँ मैं घुँघरू की तरह ... मैं   करता रहा औरों की कही मेरे मन की ये बात मन ही में रही है ये कैसा गिला जिसने जो कहा करता ही रहा हूँ मैं घुँघरू की तरह ... अपनों  में रहे या ग़ैरों में घुँघरू की जगह तो है पैरों में कभी मन्दिर में कभी महफ़िल में सजता ही रहा हूँ मैं घुँघरू की तरह ...

मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया

मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया जो लिखा था जो लिखा था आँसुओं के संग बह गया मेरा जीवन ... इक  हवा का झोंका आया-2 टूटा डाली से फूल-2 ना पवन की ना चमन की किसकी है ये भूल -2 खो गई-2  खुशबू हवा में कुछ न रह गया मेरा जीवन ... उड़ते  पंछी का ठिकाना-2 मेरा न कोई जहाँ-2 ना डगर है ना खबर है जाना है मुझको कहाँ-2 बन के सपना -2  हमसफ़र का साथ रह गया मेरा जीवन ... दुख  के अन्दर सुख की ज्योती दुख ही सुख का ज्ञान-2 दर्द सह के जन्म लेता हर कोई इनसान-2 वो सुखी है-2  जो खुशी से दर्द सह गया मेरा जीवन ...