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ये क्या हुआ कैसे हुआ कब हुआ

ये क्या हुआ , कैसे हुआ , कब हुआ अब क्या सुनाएं ? ( ये क्या हुआ , कैसे हुआ , कब हुआ , क्यूँ हुआ , जब हुआ , तब हुआ -2 ) ओ छोड़ो , ये ना सोचो , ये क्या हुआ... हम क्यूँ , शिकवा करें झूठा , क्या हुआ जो दिल टूटा -2 शीशे का खिलौना था , कुछ ना कुछ तो होना था , हुआ ये क्या हुआ... ऐ दिल , चल पीकर झूमें , इन्हीं गलियों में घूमें -2 यहाँ तुझे खोना था , बदनाम होना था , हुआ ये क्या हुआ... हमने जो , देखा था सुना था , क्या बताऐं वो क्या था -2 सपना सलोना था , खत्म तो होना था , हुआ ये क्या हुआ...

ये जो मुहब्बत है ये उनका है काम

ये जो मुहब्बत है , ये उनका है काम महबूब का जो , बस लेते हुए नाम मर जाएं ,  मिट जाएं ,  हो जाएं बदनाम रहने दो छोड़ो भी जाने दो यार हम ना करेंगे प्यार रहने दो छोड़ो भी जाने दो यार हम ना करेंगे प्यार टूटे अगर सागर नया सागर कोई ले ले मेरे खुदा दिल से कोई किसी के न खेले दिल टूट जाए तो क्या हो अंजाम ये जो ... आँखे किसी से न उलझ जाए मैं डरता हूँ यारों हसीनों की गली से मैं गुज़रता हूँ बस दूर ही से कर के सलाम ये जो ...

तुम आ गए हो नूर आ गया

किशोर:            तुम आ गए हो नूर आ गया है -2 नहीं तो चराग़ों से लौ जा रही थी लता:    जीने कि तुमसे वजह मिल गई है बड़ी बेवजह ज़िंदगी जा रही थी किशोर:            तुम आ गए हो नूर आ गया है किशोर:            कहाँ से चले कहाँ के लिये ये खबर नहीं थी मगर कोइ भी सिरा जहाँ जा मिला वहीं तुम मिलोगे के हम तक तुम्हारी दुआ आ रही थी तुम आ गये हो नूर आ गया हैं लता:    नहीं तो चराग़ों से लौ जा रही थी तुम आ गए हो नूर आ गया हैं लता:    दिन डूबा नहीं रात डूबी नहीं जाने कैसा है सफ़र ख़्वाबों के दिये आँखों में लिये वहीं आ रहे थे जहाँ से तुम्हारी सदा आ रही थी तुम आ गये हो नूर आ गया हैं नहीं तो चरागों से लौ जा रही थी

पत्थर की हवेली को शीशे के घरौंदों में

ल: इस मोड़ से जाते हैं -2 कुछ सुस्त क़दम रस्ते कुछ तेज़ क़दम राहें -2 कि: पत्थर की हवेली को शीशे के घरौंदों में तिनकों के नशेमन तक इस मोड़ से जाते हैं ल: आँधी की तरह उड़कर इक राह गुज़रती है -2 शरमाती हुई कोई क़दमों से उतरती है इन रेशमी राहों में इक राह तो वो होगी तुम तक जो पहुंचती है इस मोड़ से जाती है इस मोड़ से जाते हैं... कि: इक दूर से आती है पास आके पलटती है -2 इक राह अकेली सी रुकती है न चलती है ल: ये सोचके बैठी हूँ इक राह तो वो होगी तुम तक जो पहुंचती है इस मोड़ से जाते हैं इस मोड़ से जाते हैं कुछ सुस्त क़दम रस्ते कुछ तेज़ क़दम राहें कि: पत्थर की हवेली को शीशे के घरोंदों में तिनकों के नशेमन तक इस मोड़ से जाते हैं ल: इस मोड़ से जाते हैं

ओ मांझी रे अपना किनारा नदिया की धारा है

ओ मांझी रे ,  अपना किनारा ,  नदिया की धारा है ओ मांझी रे ... साहिलों पे बहने वाले , कभी सुना तो होगा कहीं , ओ ... हो ,  कागज़ों की कश्तियों का , कहीं किनारा होता नहीं हो मांझी रे ... मांझी रे कोई किनारा जो किनारे से मिले वो , अपना किनारा है ... , ओ मांझी रे ... पानियों में बह रहे हैं , कई किनारे टूटे हुए ओ ... हो , रास्तों में मिल गए हैं     , सभी सहारे छूटे हुए ... कोइ सहारा मझधारे में मिले वो , अपना सहारा है ... ओ मांझी रे ,  अपना किनारा ,  नदिया की धारा है ओ मांझी रे ...

कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना

कुछ तो लोग कहेंगे , लोगों का काम है कहना छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना -2 कुछ तो लोग कहेंगे , लोगों का काम है कहना कुछ रीत जगत की ऐसी है , हर एक सुबह की शाम हुई -2 तू कौन है , तेरा नाम है क्या , सीता भी यहाँ बदनाम हुई फिर क्यूँ संसार की बातों से , भीग गये तेरे नयना कुछ तो लोग कहेंगे , लोगों का काम है कहना छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना कुछ तो लोग कहेंगे ... हमको जो ताने देते हैं , हम खोए हैं इन रंगरलियों में -2 हमने उनको भी छुप छुपके , आते देखा इन गलियों में ये सच है झूठी बात नहीं , तुम बोलो ये सच है ना कुछ तो लोग कहेंगे , लोगों का काम है कहना छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना कुछ तो लोग कहेंगे ...

दिल ऐसा किसीने मेरा तोड़ा बर्बादी की तरफ़ ऐसा मोड़ा

दिल ऐसा किसीने मेरा तोड़ा ,   बर्बादी की तरफ़ ऐसा मोड़ा -2 एक भले मानुश को , अमानुश बनाके छोड़ा दिल ऐसा किसीने मेरा तोड़ा , बर्बादी की तरफ़ ऐसा मोड़ा साग़र कितना मेरे पास है ,   मेरे जीवन में फिर भी प्यास है -2 है प्यास बड़ी जीवन थोड़ा , अमानुश बनाके छोड़ा... कहते हैं ये दुनिया के रास्ते , कोई मंज़िल नहीं तेरे वास्ते -2 नाकामियों से नाता मेरा जोड़ा , अमानुश बनाके छोड़ा... डूबा सूरज फिर से निकले , रहता नहीं है अंधेरा मेरा सूरज ऐसा रूठा , देखा न मैंने सवेरा उजालों ने साथ मेरा छोड़ा , अमानुश बनाके छोड़ा दिल ऐसा किसीने मेरा तोड़ा...